B O O K S C A M E L

Loading

Bookscamel is a leading company among book publishers in India. With over 8 years of experience in the publishing industry, we understand the needs of readers. Our publishing platform gives authors an opportunity to reach millions of readers. We are one of the most trusted book publishers in India and have a reputed presence in the nation in terms of quality printing and publishing support. Connect with our publishing consultants to know more about publishing opportunities at Bookscamel.

Manavta Ke Din Kab Bahurenge

Stock availability
(0 Customer Reviews)

Author: Rajendra Prasad

₹190.00

SKU: Book230766C
ISBN: 9789364266185
Book Size: 5*8
No of Pages: 114
Paper Color: Cream Paper
Cover Lamination: Glossy
Language:
Launch Date: 29 May, 2025
Also Available On:

“ मानवता के दिन कब बहुरेंगे “ नामक यह कविता-संग्रह मेरी काव्यात्मक यात्रा का चतुर्थ योगदान है। इसके पूर्व प्रकाशित मेरे तीन कविता-संग्रह और उनके बारे में सुधीजनों ,विशेषकर समीक्षकों की समीक्षाएं, मेरी रचनाधर्मिता को निरंतर पुष्ट करती रही हैं। ये विचार-प्रधान रचनात्मक कवितायें देश-काल और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप मेरे मनोभाव, क्रियाशील चिंतन और सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनाओं की खुली अभिव्यक्ति हैं। इस नए काव्य संग्रह की सारी कविताएं बदलते परिवेश में मानवता का तेवर नापने का बैरोमीटर हैं; साथ ही इनमें व्यक्ति, समाज और वैश्विक स्तर पर पीड़ित मानवता के वर्तमान और भविष्य की चिंता है। ये कविताएं यथार्थ से प्रत्यक्ष टक्कर लेती हुईं मानव को केंद्र में पाकर उसकी परिक्रमा कर रही हैं। इन कविताओं में व्यक्ति, समाज, राष्ट्र, विश्व और प्रकृति में होने वाले परिवर्तन और उत्पन्न चुनौतियों के विरूद्ध आत्मशक्ति को जगाने की अनथक चिंता है। इन कविताओं के कलेवर में आत्म-चेतना और बोध का इतना प्रबल भाव है कि कवि का काव्यशील मन संघर्ष से न थकता है, न ऊबता है, अपितु विषम से विषम परिस्थितियों में उच्च मनोबल के साथ लक्ष्य पाने की दिशा में बढ़कर कठिनाइयों का पहाड़ पार कर लेता है। स्पष्टत: मेरे काव्य रचना-संस्कार में दर्शन, इतिहास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कला व अध्यात्म का आशावादी , उपयोगितात्मक , लोकहितकारी और बहुआयामी संगम है। साथ ही इन कविताओं के काव्य शिल्प में नव सौंदर्यात्मक, मूल्यगत, ज्ञानात्मक, अस्तित्ववादी तथा अध्यात्मवादी मूल्यों की अनुगूँज प्रतिध्वनित होती है, जो चंद लम्हों में ही विराट आत्मा तक का सफर पूरा कर लेती है।इनमें 21वीं शताब्दी में उत्तर-आधुनिकता काल से नवयुगीन रचनाधर्मिता तक के व्यापक परिप्रेक्ष्य में मानव ही नहीं , अपितु अन्य जीवों की जिंदगी का जिंदगी से साक्षात्कार का संज्ञानात्मक शंखनाद भी है। इस कविता-संग्रह में उतार-चढ़ाव से भरे मनुष्य की जिंदगी की विचार-सरिता में उठने वाली लहरों का कल-कल निनाद व निर्मल प्रवाह है। इन कविताओं में उदात्त अंत:प्रेरणा है , जो हमें व्यक्ति, समाज, राष्ट्र, और विश्व के परिप्रेक्ष्य में भिन्न-भिन्न परिस्थितियों, सांसारिक हितों व आदर्शों, संकल्पों और विकल्पों का गुणानुवाद करके नीर-क्षीर विवेक हासिल करने के लिए भाव-प्रवण रचनाधर्मिता से जोड़ती है। इस संग्रह की कविताएं समृद्ध भारतीय संस्कृति व परम्परा, देश-काल परिवर्तन और सूचना- क्रांति के बावजूद सुरक्षित बौद्धिकता की काव्यात्मक सरसता का समेकित कोष हैं। इन कविताओं में निराशा नहीं, बल्कि आशा और उपयोगिता के बीज सन्निहित हैं।इनमें निहित विचार-क्रियाओं में मानव जीवन और जिजीविषा की संजीवनी शक्ति है, जो मुझे मानवता के पक्ष में कुछ बोलने और करने के लिए प्रेरित करती है। इनमें उच्च शिक्षा के क्षेत्र के मेरे अनुभवों और क्रियाशीलता की भावभूमि से उपजे वे ज्ञान-तत्व समाहित हैं, जिनके लिए मैंने लम्बी यात्रा तय की है। तत्क्रम में, मैंने महायोगी गुरु गोरक्षनाथजी की पावन नगरी गोरखपुर से प्रारम्भ कर विश्व-धरोहर ‘ताजमहल’ की नगरी आगरा , फिर संगम-नगरी ‘प्रयागराज’ होते हुए महात्मा बुद्ध के ज्ञान और बोधि की भूमि ‘बोधगया’ तक की अपनी पंचदशकीय महायात्रा पूर्ण की है। आजकल मैं“ जैसे उड़ि जहाज को पंछी पुनि जहाज पर आवै “ की सुखद स्थिति में गोरखपुर में कृतकार्य अवस्था में विश्राम कर रहा हूँ, पर लेखन और सामाजिक सरोकार में सहभागिता अनवरत जारी है। इस कविता-संग्रह की कविताएं, मेरी सतत् प्रेरणा-स्रोत पूजनीया माताश्री श्रीमती प्यारी देवी और मातृभूमि भारत को “जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की उदात्त भावना से समर्पित हैं। मेरी कविताई की सुंदर साजसज्जा और प्रकाशन की पूरी टीम बधाई की हकदार हैं, जिन्होंने पूरी लगन और तन्मयता से इस काव्य- संग्रह को समय से प्रकाशित करके इसको पाठकों तक सर्वसुलभ बनाया है। आशा ही नहीं , पूर्ण विश्वास है कि इस काव्य-संग्रह की कविताएं सुधी पाठकों, स्नेही कविजनों और समीक्षकों को जोड़ने व रससिक्त करने में सफल होंगी ।

SKU Book230766C
ISBN 9789364266185
Dimensions 5*8
Total Page 114
Paper Color Cream Paper
Cover Laminations Glossy
Language
Publish Date 29 May, 2025

No reviews found.

Your Rating*

Your Name*
Your Email*
Your Rating (1-5)*
Message*

Related Products

Discover books from our collection.

Jeevan ka Saraansh
  • ₹150.00
  • Dr. Neerja khare
IDEOLOGICAL INTERSTICES: NEW HISTORICISM, CULTURAL HYBRIDITY, AND THE SUBALTERN VOICE IN GHOSH
  • ₹349.00
  • Dr. HITESH B JOSHI
An Unfinished Love
  • ₹246.00
  • Syed Abdul Hai
The Cyber Smart Kid
  • ₹275.00
  • Rajesh Thakur
Air Menifestation
  • ₹195.00
  • Tejas Purohit
Final Realization
  • ₹200.00
  • Hasu
Pandit Deendayal Upadhyay
  • ₹360.00
  • Sunil Kumar Pandit
UNSUNG HEROS
  • ₹528.00
  • Krishan Lal ‘Dhanak’
Environmental Justice for Cultural Survival
  • ₹565.00
  • Dr. Vikas V Patel, Dr. Neeraj Pal Malik
MICRO HEALING... 51 TIPS
  • ₹199.00
  • Dr. ROY SAMUEL KALAYIL AND FR. JOHNSON CHARIVUKALAYIL